पेड़-पौधों
में कई प्रकार की बीमारियाँ बैक्टीरिया से उत्पन्न हो जाती है जिसका नियंत्रण जीवाणुनाशक दवा से ही किया जाता है| ये रसायन
जीवाणु यानि बेक्टीरिया के स्पोर पर हमला कर इन्हें नष्ट कर देते है| टमाटर में
बैक्टीरियल स्पॉट (tomato
bacterial spot) या बैक्टीरियल लीफ़
ब्लाइट और बैक्टीरियल केंकर (bacterial
canker in tomato) तथा गोभी की फसल
में ब्लेक रोट (black rot in
cabbage), कपास में
बैक्टीरियल ब्लाइट (bacterial
blight in cotton) और एंगुलर लीफ
स्पॉट (angular leaf spot
in cotton), आम में बैक्टीरियल
ब्लेक स्पॉट (bacterial black
spot in mango), आलू का स्कैब रोग (scab of potato), धान का पैनिकल
ब्लाइट (panicle blight in
rice), सेब और नाशपाती में
फायर ब्लाइट (fire blight of
apple & pear) तथा नींबू में
सिट्रस केंकर (citrus canker) रोग बैक्टीरिया की वजह से पैदा होता है| इन रोगों
के लिए जीवाणुनाशक दवा को प्रयोग करके नियंत्रण किया जाता है जिसमें पहला है
कासुगमाइसिन (Kasugamycin 3% SL)👇
यह antibiotic, systemic bactericide and fungicide) है, जो पौधे के अन्दर system में फैल जाता है| यह protective और curative काम करता है यानि पौधे में बीमारी है तो उसे नष्ट करता है और अगर नही है तो उसे बचाता है| इसके साथ यह एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम कवकनाशी है. यह स्प्रे के आधे घंटे में फसल में फैल जाता है जिससे बरसात होने पर भी दवा का असर कम नही होता| यह बहुत क्षारीय उत्पाद को छोड़कर अधिकांश सभी कवकनाशी और कीटनाशकों के साथ संगत है यानि मिलाया जा सकता है. यह पौधों में बहुत तेजी से और प्रभावी ढंग से फैल कर रोगों को control करता है| Kasugamycin, बेक्टीरिया में प्रोटोन संश्लेषण को close कर देता है जिससे bacteria नष्ट हो जाते है| यह मार्केट में Kasu-B और बायोमाइसिन ब्राण्ड के नाम से मिलता है जो SL यानि Soluble Liquid फोरमेशन में होता है.
कासुगमाइसिन की मात्रा (Dose of Kasugamycin 3% SL)👇
यह केमिकल विभिन्न फसलों जैसे धान के ब्लास्ट रोग में 400-600 मिली और कपास में बैक्टीरियल ब्लाइट और एंगुलर लीफ स्पॉट रोग के लिए 300 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कर सकते है|
इसके अलावा दूसरे bacterial diseases जैसे टमाटर में लगने वाले Leaf Mould, Bacterial Spot, Bacterial Canker रोग, मिर्च में होने वाले Bacterial Leaf Spot, Bacterial blight रोग, बैगन का Bacterial wilt रोग, तरबूज व खरबूज में लगने वाले Bacterial Anthracnose, Angular Leaf Spot) रोग, खीरा का Angular Leaf Spot रोग, पत्ता गोभी का Black Rot, नींबूवर्गीय पेड़ों का Citrus Canker, प्याज का Bacterial Rot और अंगूर का Bacterial Anthracnose रोग से इस केमिकल द्वारा नियंत्रण किया जाता है| इसकी डोज़ लगभग 1 ml प्रति लीटर रखी जाती है|
कॉपर ऑक्सीकलोराइड (Copper Oxychloride 50% WP)
यह बाजार में Dhanucop, Blue copper, Blitox नाम से उपलब्ध है| यह एक copper based broad spectrum और contact fungicide है, जो fungus के
साथ-साथ बैक्टीरिया जनित रोगों को भी नियंत्रित करता है| यह अपने बारीक कणों के कारण, पत्तियों से चिपक जाता है और fungus और
बैक्टीरिया के growth को रोकने में मदद करता है.
कॉपर ऑक्सीकलोराइड की मात्रा (Dose of Copper Oxychloride 50% WP)👇
इसकी डोज़ की बात करे तो यह अंगूर में एन्थ्रेक्नोज, बेक्टीयल लीफ ब्लाइट रोग के लिए 300 ग्राम और धान के ब्लास्ट के लिए 300 ग्राम, आलू के Early And Late Blight के लिए 1 किलो, टमाटर के अगेती झुलसा (Early blight), पिछेती झुलसा (late blight) और लीफ स्पॉट के लिए 1 किलो, मिर्च की फसल में Leaf Spot, Fruit Rot के लिए 1 किलो, केले में Banana Leaf Spot, Fruit Rot के लिए 1 किलो, अंगूर में Downy Mildew के लिए 1 किलो तथा नींबू वर्गीय पेड़ों में citrus canker के लिए 1 किलो प्रति 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करे|
कासुगमाइसिन और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Kasugamycin 5% + Copper Oxychloride 45% WP) 👇
यह बाजार में Conika के नाम से मिलता है| जिसमें कई फसलों में Bacterio-fungal complex formation को रोकने की क्षमता होती है. यह एक contact और Systemic fungicide है|
यह कपास के Bacterial blight और Angular leaf spot, टमाटर के Damping off और Bacterial spot, धान
में bacterial leaf blight, मिर्च में बैक्टीरियल स्पॉट, आम में बैक्टीरियल ब्लेक स्पॉट, नींबू में सिट्रस केंकर रोग, खीरा में leaf spot रोग आदि के नियंत्रण के लिए 300 ग्राम मात्रा को
200 लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जाता है|
स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (Streptocycline)👇
यह स्ट्रेप्टोसाइक्लिन
एक जीवाणुरोधी यानि antibiotic दवा है जो पौधों के bacterial diseases के प्रभावी नियंत्रण के
लिए काम में आती है| यह 9: 1 के अनुपात में स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट और
टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड युक्त पीले रंग का पाउडर है जो पानी में आसानी से
घुलनशील है| Systemic
तरीके
से काम कर यह छिड़काव में आसानी से पौधे में absorbed हो जाता है और पौधों के अंदर चला जाता है,
स्ट्रेप्टोसाइक्लिन आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकांश कीटनाशकों
और कवकनाशी के साथ संगत है.यानि
मिलाया जा सकता है| यह
धान में बैक्टीरियल लीफ़
ब्लाइट के लिए, गन्ना में bacterial
disease के लिए, टमाटर और मिर्च में बैक्टीरियल
स्पॉट के लिए, कपास में बैक्टीरियल ब्लाइट और एंगुलर लीफ स्पॉट, आम में बैक्टीरियल
ब्लेक स्पॉट, नींबू में सिट्रस केंकर रोग के लिए 6 ग्राम प्रति 60 से 120 लीटर पानी
के साथ, तथा फूलगोभी और पत्तगोभी में ब्लेक स्पॉट और ब्लेक रोट के लिए 6 ग्राम
प्रति 60 लीटर पानी के साथ, खीरा के पत्ती धब्बा रोग के लिए 6 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन की मात्रा को 60 से 120 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना चाहिए.
ये सभी पौधों में लगने वाले बैक्टीरियाजनित रोगों के नियंत्रण के लिए काम
में आते है|
आपका कोई भी सुझाव या जानकारी सहृदय आमंत्रित है| कमेन्ट करके जरूर बताए ....धन्यवाद🙏